सुर्य ग्रहण – कब, कहाँ, कैसे

Diamond ring effect at third contact—the end of totality—with visible prominences,
Credit: Wikipedia

21/06/2020

भौतिक विज्ञान की दृष्टि से जब सूर्य व पृथ्वी के बीच में चन्द्रमा आ जाता है तो चन्द्रमा के पीछे सूर्य का बिम्ब कुछ समय के लिए ढक जाता है, उसी घटना को सूर्य ग्रहण कहा जाता है।

सूर्य ग्रहण में एक पल के लिए परछाईं भी हो जाएगी गायब

Pinhole projection method of observing partial solar eclipse. Insert (upper left): partially eclipsed Sun photographed with a white solar filter. Main image: projections of the partially eclipsed Sun (bottom right)

जब सूर्य कर्क रेखा के ऊपर होता है तो दोपहर में एक पल ऐसा भी आता है कि जब परछाईं भी साथ छोड़ देती है। इस दिन सूर्य की किरणें करीब 15 से 16 घंटे धरती पर पड़ती हैं। इसी दिन दक्षिणी गोलार्ध में ठीक उल्टा होता है।

रविवार 21 जून को सूर्य ग्रहण लगने जा रहा है.

देश के कुछ हिस्सों में ये वलयाकार दिखेगा, लोग ‘रिंग ऑफ़ फ़ायर’ या ‘आग के छल्ले’ का दीदार कर पाएंगे.

हालांकि, देश के ज़्यादातर हिस्सों में सूर्य ग्रहण आंशिक ही दिखेगा.चन्द्रमा की छाया सूर्य का करीब 99% भाग ही ढकेगी। आकाशमण्डल में चन्द्रमा की छाया सूर्य के केन्द्र के साथ मिलकर सूर्य के चारों ओर एक वलयाकार आकृति बनायेगी। जिससे सूर्य आसमान में एक आग की अंगूठी की तरह नजर आएगा। साल के सबसे बड़े दिन पर ये ग्रहण लगने जा रहा है। जब चंद्रमा पृथ्वी और सूर्य के बीच में आता है और सूर्य के मध्य भाग को पूरी तरह से ढक लेता है तो इस घटना को वलयाकार सूर्य ग्रहण कहा जाता है। इसके परिणामस्वरूप सूर्य का घेरा एक चमकती अंगूठी की तरह दिखाई देता है।

सूर्यग्रहण कब दिखेगा?

सूर्य ग्रहण की शुरुआत राजस्थान के घरसाणा में सुबह 10:12 मिनट पर होगी और ये 11:49 बजे से वलयाकार दिखना शुरू होगा और 11:50 बजे ख़त्म हो जाएगा.

From space, the Moon’s shadow during a solar eclipse appears as a dark spot moving across the Earth.

राजस्थान के सूरतगढ़ और अनूपगढ़, हरियाणा के सिरसा, रतिया और कुरुक्षेत्र, उत्तराखंड के देहरादून, चंबा, चमोली और जोशीमठ जैसी जगहों पर ये ‘आग का छल्ला’ एक मिनट के लिए दिखेगा.

दिल्ली में इसकी शुरुआत सुबह 10:20 बजे होगी और ये 1:48 बजे ख़त्म हो जाएगा. मुंबई में इसका समय सुबह 10 बजे से दोपहर 1:27 बजे तक है. चेन्नई में 10:22 बजे से 1:41 बजे तक और बेंगलुरु में 10.13 बजे से 1.31 बजे तक ये सूर्य ग्रहण दिखेगा.

देश के ज़्यादातर हिस्सों में लोग आंशिक सूर्य ग्रहण ही देख पाएंगे. कोलकाता में आंशिक सूर्य ग्रहण की शुरुआत सुबह 10:46 बजे होगी और ये 2:17 बजे ख़त्म हो जाएगा.

दुनिया में सबसे पहले कहां दिखेगा?

अफ्रीका महादेश में कांगो के लोग दुनिया में सबसे पहले वलयाकार सूर्य ग्रहण का दीदार कर पाएंगे और ये भारत के राजस्थान पहुंचने से पहले दक्षिणी सूडान, इथोपिया, यमन, ओमान, सऊदी अरब, हिंद महासागर और पाकिस्तान से होकर गुज़रेगा.

भारत के बाद तिब्बत, चीन और ताइवान के लोग इसे देख पाएंगे. प्रशांत महासागर के बीच पहुंचकर ये समाप्त हो जाएगा.

आइये सुर्य ग्रहण के बारे में विस्तार से जानने से पहले. ग्रहण को समझने का प्रयास करते हैं आखिर ग्रहण का अर्थ क्या है

ग्रहण

Geometry of a total solar eclipse (not to scale)

खगोलीय दृष्टि से ग्रहण वह अवस्था है जिसमें कोई खगोलिय पिंड जैसे ग्रह या उपग्रह किसी प्रकाश के स्रोत जैसे सुर्य और दूसरे खगोलीय पिंड जैसे पृथ्वी के बीच आ जाता है जिससे प्रकाश कुछ समय के लिये आंशिक या पुर्ण रूप से अवरोध हो जाता है। उदाहरण के लिए सुर्य ग्रहण, चंद्र ग्रहण.

आइये सुर्य ग्रहण के बारे में विस्तार से जाने:

Each icon shows the view from the centre of its black spot, representing the Moon (not to scale)
Image Credit:wikipedia

पृथ्वी सूरज की परिक्रमा करती है और चाँद पृथ्वी की। जब चाँद, सूरज और पृथ्वी के बीच आ जाता है। तब वह सूरज की कुछ या सारी रोशनी रोक लेता है जिससे धरती पर अंधेरा फैल जाता है। इस घटना को सूर्य ग्रहण कहा जाता है। यह घटना हमेशा अमावस्या को ही होती है।

चांद से 400 गुना बड़ा है सूर्य, फिर कैसे चांद, सुर्य को ढक लेता हैं- आइये जाने

यह सचमुच रोचक बात है कि पृथ्‍वी का चंद्रमा आकार में सूर्य में बहुत छोटा है। सूर्य इससे 400 गुना बड़ा है। जब ग्रहण घटित होता है तो दोनो का आकार हमें पृथ्‍वी से देखने पर समान मालूम पड़ता है। तभी तो सूर्य पूरा ढक जाता है। हालांकि दोनों का जो आभासीय आकार है, वह मात्र आधी डिग्री का ही है। सच्‍चाई यह है कि सूर्य चांद से 400 गुना बड़ा है, इसके बाद भी चांद सूर्य की किरणों को पृथ्‍वी पर आने से रोक देता है

ग्रहण के समय इतनी होगी सूर्य से पृथ्‍वी की दूरी

ग्रहण के दौरान सूर्य की पृथ्वी से 15 करोड़ 2 लाख 35 हज़ार 882 किमी की दूरी रह जाएगी। इस दौरान चांद भी 3 लाख 91 हज़ार 482 किमी की दूरी से अपने पथ से गुजर रहा होगा। अगर चांद इस दौरान पृथ्‍वी के और पास होता तो यह ग्रहण एक पूर्ण सूर्यग्रहण बन जाता। इसी तरह अगर सूर्य थोड़ा और पास होता तो ग्रहण का नज़ारा बदल जाता। लेकिन अब यह ग्रहण वलयाकार होगा, यानी चांद पूरी तरह से सूर्य को नही ढंक पाएगा। करीब 30 सेकंड के लिए ही चांद सूर्य के बड़े भाग को कवर करेगा। अंत में सूर्य का आखिरी हिस्सा एक चमकती हुई रिंग के समान नजर आएगा। 30 सेकंड के बाद यह ग्रहण समाप्‍त हो जाएगा।

ग्रहण के साथ एक और खगोलीय घटना का संयोग

इस बार सूर्य ग्रहण के साथ एक और संयोग है। यह एक दुर्लभ खगोलीय घटना का निर्माण कर रहा है। यह ग्रहण ऐसे दिन होने जा रहा है जब उसकी किरणें कर्क रेखा पर सीधी पडेंगी। इस दिन उत्तरी गोलार्ध में सबसे बड़ा दिन और सबसे छोटी रात होती हैं

सूर्य ग्रहण प्रकार

चन्द्रमा द्वारा सूर्य के बिम्ब के पूरे या कम भाग के ढ़के जाने की वजह से सूर्य ग्रहण तीन प्रकार के होते हैं

1. पूर्ण सूर्य ग्रहण

2. आंशिक सूर्य ग्रहण

3. वलयाकार सूर्य ग्रहण

1. पूर्ण सूर्य ग्रहण

पूर्ण सूर्य ग्रहण उस समय होता है जब चन्द्रमा पृथ्वी के काफ़ी पास रहते हुए पृथ्वी और सूर्य के बीच में आ जाता है और चन्द्रमा पूरी तरह से पृ्थ्वी को अपने छाया क्षेत्र में ले ले फलस्वरूप सूर्य का प्रकाश पृ्थ्वी तक पहुँच नहीं पाता है और पृ्थ्वी पर अंधकार जैसी स्थिति उत्पन्न हो जाती है तब पृथ्वी पर पूरा सूर्य दिखाई नहीं देता। इस प्रकार बनने वाला ग्रहण पूर्ण सूर्य ग्रहण कहलाता है।

2. आंशिक सूर्य ग्रहण

आंशिक सूर्यग्रहण में जब चन्द्रमा सूर्य व पृथ्वी के बीच में इस प्रकार आए कि सूर्य का कुछ ही भाग पृथ्वी से दिखाई नहीं देता है अर्थात चन्दमा, सूर्य के केवल कुछ भाग को ही अपनी छाया में ले पाता है। इससे सूर्य का कुछ भाग ग्रहण ग्रास में तथा कुछ भाग ग्रहण से अप्रभावित रहता है तो पृथ्वी के उस भाग विशेष में लगा ग्रहण आंशिक सूर्य ग्रहण कहलाता है।

3. वलयाकार सूर्य ग्रहण

वलयाकार सूर्य ग्रहण में जब चन्द्रमा पृथ्वी के काफ़ी दूर रहते हुए पृथ्वी और सूर्य के बीच में आ जाता है अर्थात चन्द्र सूर्य को इस प्रकार से ढकता है, कि सूर्य का केवल मध्य भाग ही छाया क्षेत्र में आता है और पृथ्वी से देखने पर चन्द्रमा द्वारा सूर्य पूरी तरह ढका दिखाई नहीं देता बल्कि सूर्य के बाहर का क्षेत्र प्रकाशित होने के कारण कंगन या वलय के रूप में चमकता दिखाई देता है। कंगन आकार में बने सूर्यग्रहण को ही वलयाकार सूर्य ग्रहण कहलाता है।

वैज्ञानिकों के लिए सुर्य ग्रहण का महत्व:

दुनिया भर के वैज्ञानिकों के लिए यह अवसर किसी उत्सव से कम नहीं होता। क्यों कि ग्रहण ही वह समय होता है जब ब्राह्मंड में अनेकों विलक्षण एवं अद्भुत घटनाएं घटित होतीं हैं जिससे कि वैज्ञानिकों को नये नये तथ्यों पर कार्य करने का अवसर मिलता है। 1968 में लार्कयर नामक वैज्ञानिक नें सूर्य ग्रहण के अवसर पर की गई खोज के सहारे वर्ण मंडल में हीलियम गैस की उपस्थिति का पता लगाया था। आईन्स्टीन का यह प्रतिपादन भी सूर्य ग्रहण के अवसर पर ही सही सिद्ध हो सका.

चन्द्रग्रहण तो अपने संपूर्ण तत्कालीन प्रकाश क्षेत्र में देखा जा सकता है किन्तु सूर्यग्रहण अधिकतम 10 हजार किलोमीटर लम्बे और 250 किलोमीटर चौडे क्षेत्र में ही देखा जा सकता है। संसार के समस्त पदार्थों की संरचना सूर्य रश्मियों के माध्यम से ही संभव है। यदि सही प्रकार से सूर्य और उसकी रश्मियों के प्रभावों को समझ लिया जाए तो समस्त धरा पर आश्चर्यजनक परिणाम लाए जा सकते हैं।

खुली आंखों से न देखें ग्रहण

चंद्रमा की तरह सूर्य ग्रहण खुली आंखों से नहीं देखना चाहिए। ऐसा कहा जाता है कि इसका बुरा असर आपकी आंखों पर पड़ सकता है। सूर्य ग्रहण को सुरक्षित तकनीक या तो एल्युमिनेटेड मायलर, ब्लैक पॉलिमर, शेड नंबर 14 के वेल्डिंग ग्लास या टेलिस्कोप द्वारा सफेद बोर्ड पर सूर्य की इमेज को प्रोजेक्‍ट करके करके उचित फिल्टर का उपयोग करके देखा जा सकता है। एक्सपर्ट्स का कहना है कि सोलर व्यूइंग ग्लासेज (Solar viewing glasses) या टेलिस्कोप-दूरबीन जैसे स्पेशल फिल्टर्स का इस्तेमाल करना चाहिए। सूरज को सीधे देखने से आंखों का पर्दा खराब हो सकता है और हमेशा के लिए आंखों की रोशनी जा सकती है।

सूर्य ग्रहण के दौरान ध्यान रखें ये बातें

बच्चों से लेकर बड़ों तक कोई भी इस ग्रहण को नंगी आंख से न देखें। नासा के अनुसार, सूर्य ग्रहण को देखने के लिए सोलर फिल्टर ग्लास वाले चश्में का इस्तेमाल करें।यह भी सलाह है कि घर के बनाए जुगाड़ वाले चश्मे या किसी लेंस से सूर्य ग्रहण न देखें। इससे आपकी आंख पर बुरा असर हो सकता है।  ग्रहण के वक्त आकाश की ओर देखने से पहले सोलर फिल्टर चश्मा लगाएं और नजर नीचे करने के बाद या ग्रहण समाप्त होने के बाद ही इसे हटाएं।

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